महेन्द्र मिश्रा री कवितावां


शहर
शहर...
जीभ कतरणी
मन में जहर।
काणी आंख्यां काजळ रेख
हिवड़ै काळख
उजळो भेख।
तूं सांपां में मिनख भाळै
भोळा, गेलो कोई और ई देख।
***

गाम
गाम
फूटेड़ो ठाम।
जिणरो का'ल ऊजळो
आज धूंधळो
सुंवारो....
बिकसी फूट रै दाम।
गाम
फूटेड़ो ठाम।
***

रूंख
रूंख...
आयो मेटतो
मिनख री भूख।
पण आ भूख
हाल हिड़कागी
अर साबता ही खा'गी।
***

आंसू
आंसू....
फगत खारो पाणी।
पण गावै मांयलो दुख
बिना बाणी।
***

बात
जीभ री करामात।
ओळ्यूं रा ओळमा
अर करै काळजै घात।
***

नार
घर रो सिणगार
चौकै रो च्यानणो
अर मुळकतो आंगणो।
***

पाणी
जूण रो धणी।
कुवां में सूख्यां
आंख्यां में संचरै
अर सिर में ढुळ्यां
मूंडै स्यूं उतरै।
***

खोटा करम उजाळो ना
बैठ काळजो बाळो ना,
खोटा करम उजाळो ना।

भाई-बीरां री बात करो थे,
कादो-कीचड़ उछाळो ना।

म्हारी पौळी थां सारू खुल्ली,
अठै कुंडो कोनी ताळो ना।

सीधी-सादी बात करां म्हे
म्हारै मनड़ै कोई काळो ना।

पाड़ोस्यां री भींतां कच्ची,
बड़भागी थे गाळो ना।

रोटी सारू राड़ माच री,
थे बातां में टाळो ना।

मिनख जमारो पाय भायला,
हाथां औसर गाळो ना।

घर-घर में गायां न बांधो,
खाणा गंडक पाळो ना।
 ***


महेन्द्र मिश्रा 21 सितंबर, 1968 नैं गांव बूचावास तहसील तारानगर जिला चूरू मांय जलम।
आजकाल राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नोहर मांय प्राध्यापक (हिंदी) पद माथै सेवारत।
कानांबाती : 9413536388

1 टिप्पणी:

  1. Hey Bhagwan ..!!! Guruji ro O Roop To Kade Dekhyo hi ni ho ...Bhot Khub Guruji ..Abe Laage Hai Ye Syat O Padhne Likhne ro Kido ..Aap Logan ri hi Den hai ...!! Neeraj Ji ek bar ferun Dhanywad ..!!

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