भगवती पुरोहित री कवितावां

काळ
फोड़ देवूं
जे लाधै थारो ढूंढो
बाळ देवूं
जे दीखै थारो मुंडो !
काळ तूं लागै
म्हानै खारी गाळ
बाळणजोगा तूं भखग्यो
घर गुवाड़ी गांव
कैर फ़ोग
बोरड़ी अर जाळ !

अबकै जे दिस्सै
काळ गुंडो
खोदूं मरौधर में दरड़ो
अर गाडूं इस्सो ऊंडो
कै फ़ेर नीं दीस्सै
थारो बाळणजोगो मुंडो !
***

छपनो
छपना रे छपना
अब कदैई आई मत ना !
थारी बाळी काया
अब तक नीं पांगरी
कई जमाना गया
कई जमाना आया
थारा तो भूंडा रे सपना !
छपना रे छपना
अब कदैई आई मत ना !

कचर-काकड़ी, बोर-मतीर
सगळा होग्या थारै आयां व्हीर
दरखतां रा खाया छोडा
छातां रा खाया सैतीर
किता-क ढकूं थारा ढकणा !
छपना रे छपना
अब कदैई आई मत ना !
***

मतीरो
रसां रो सरदार मतीरो
मरुधर रो लम्बरदार मतीरो !

थारी है अजब कहाणी
ऊपरस्यूं है तूं लूंठो करड़ो
भीतर है निरमळ पाणी
खावण नै इहै मीठो बत्तीरो !

थारी सीफ़ळ ऊपर
धोरी जद लेवै सबड़का
आम-अंगूर-केळा-संतरा रै
मन में लागै धड़का
मरुधर नै तूं बरदान प्रकृति रो
मरुधर रो लम्बरदार मतीरो !

धोरी थारा सेकै बीज
सूकै मेवां रै उठै खीज
गुड़ मिला जद खावां तन्नै
फिक्की लागै दुनियां री सगळी चीज़
मेवां रो भरतार मतीरो
मरुधर रो लम्बरदार मतीरो !
***

फोग
मरुधर में
भांत-भांत रा लूंठा रोग
अठै क्यूं आयो
गूंगा बावळा म्हारा फोग !

धोरी नै
जद सूं रामजी बसायो
मरग्यो बापड़ो
मरुधर में तिसायो
तूं किण रो भेज्यो आयो फोग ?

धन बळै
तन बळै
बळै तपता सगळा धोरा
ठाह नीं तनै क्यूं लागै सोरा
कीं दिन और हरयो हरखलै
फेर अठै होवैला बाळणजोग !
मरुधर में
भांत-भांत रा लूंठा रोग
अठै क्यूं आयो
गूंगा बावळा म्हारा फ़ोग !
***



श्रीमती भगवती पुरोहित
जन्म=11 अक्तूबर 1961
जन्म भोम=बीकानेर
छप्योडी पोथ्यां= मरुधर री बातां, धरती रा गीत, मांडणां कला
पुरस्कार= माता फ़ूलमति तिवारी साहित्य पुरस्कार
प्रसारण=आकाशवाणी सूरतगढ़ सूं रचनावां रो लगोलग प्रसारण
ठावो ठिकाणो= 24-दुर्गा कोलोनी, हनुमानगढ़ संगम- 335512
कानांबाती= 04552-268863

1 टिप्पणी:

  1. माताजी आपरी कवितावां भोत सांतरी है...मन नै छु गई कवितावां....

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