सुनील गज्जानी री कवितावां

भायला थूं सैर मती आइजे
भायला थू सैर मती आइजै 
सो की हर लेवै है मिनखा रो 
स्यात  इण वास्तै ओ सेर है 
अठै बड़ी बड़ी इमारता है 
लाम्बा -लाम्बा खेत नीं है 
अर नीं है रुंख रो  नांव 
भायला ! थूं सैर मती आइजै 
अठै  रा रैवासी 
केदियां जैड़ा जीवण जीवै है 
लेणा लागै है अठै रासण सू लेर 
झाझरू तांई री 
थूं गांव रो मोरियो है अर 
सगळा कागला है 
थारो हाल अठै पाणी बिण
मछली जैड़ो होवैला !
भायला ! थूं सैर मती आइजै !
सुण , अठै हवा नीं है ताज़ी 
फुटपाथ  माथै ई कटै है 
कईयां री रातां 
राज़ी री शोध मांय भूखा सोवै घणा ई 
जद कै गांव माय जिनावर भी 
खूंटी भी खूंटी ताणर सोवै है 
गांव माय मिनख अर अठै लोह बसै है 
स्यात थूं समझ गयो हुवैला 
गांव में संस्कृति है अर 
अठै सैर में चालै आथूणी बायरो 
भायला ! थूं सैर मती आइजै !
***

2 टिप्‍पणियां:

  1. thik hai bhaiala thun ghanw khani to aaije..
    or bathe ra haal chal dekhpanar aa kawita na likhdiye ki bhaiala bhular hi kadei ganw mat jaaije.hun bhalo maharo sher bhalo. pate khanlodi dhuni re alaw sun raat to kat jaawe siyaleri. ganv mai to jindgiyaana kat ri hai jiya tiyaana..abe aage likhan ra pad riya hai hinyaana so bat ne roku hun..jai ho thanri bhaila.bande su hi tarka riya ho bhaila sher mati aije..
    yogendra kumar purohit
    M.F.A>
    BIKANER,INDIA

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  2. बहुत बढिया नूवीं कविता, पण भायला, अजकाळै गांव भी तो गांव नी रैया, घणौ फरक नी रियो अबै सैर गांव मांय, आखर फूटरा चुग्‍या है अर आदरजोग सांवर दैया जी रै बगत गांव साचौ हो, उण ने निमन करता थंका, आखर सूं आपरी आदराजलि सरावण जोग है, म्‍हारी आसीस

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