नानूराम संस्कर्ता री कवितावां

गीत
आज हरिया खेतां में छांवलो आवै
आभै लील गलै, वदळां री नौका कुण चलावै?
आज भंवरा फूलां नीं बैठै; थांरी जोत किरणां में
मतवाळा ऊंचा उडै चढै!
चातकङा रा जोङा, सरिता रै सारै कियां भेळा होर्या है?
साथीङां आज म्हैं घरै नीं जावूंला
आज म्हैं आभै झाङ, विश्व विभव लूंटणो चावूं.
आज समदरियै री उछाळ में झाग वणावूं;झंझवात-
हरखीली हंसी हंसै!
आज बेवजै मुरली वाजै-सारो दिन म्हैं वै में ही लगावूंला!
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