***************************
नीरज दइया
यादवेंद्र शर्मा चंद्र नीं रैया। घणै अचरज री बात है पण साव साची है। काल चार मार्च रात नै सवा दो बजी आभै में चांद हो पण साहित्य रै आभै रो चांद आपरी सांसां पूरी करी। हिंदी अर राजस्थानी साहित्य में एक जुग रचणवाळा प्रयोगधर्मी गद्यकार चंद्र जी रो मानणो हो कै राजस्थानी भाषा प्राथमिक पोसाळां सूं जोड'ऱ टाबरां री भणाई सरू हुवणी चाइजै। कवि कन्हैयालाल सेठिया, चंद्र जी आद राजस्थानी मान्यता रो सपनो देख्यो, पण राम जाणै कद पूरो हुवैला-ओ सपनो।
आप राजस्थानी कहाणी संग्रै 'जमारो' खातर साहित्य अकादेमी नई दिल्ली सूं पुरस्कृत हुया। आप री 'समंद अर थार' (कहाणी संग्रै ) हूं गोरी किण पीव री, जोग-संजोग, चांदा सेठाणी (तीनूं उपन्यास) तास रो घर (नाटक) राजस्थानी पोथ्यां घणी चावी हुई। राजस्थानी री पैली रंगीन फिलम 'लाज राखो राणी सती' रा लेखक चंद्र जी है।फणीश्वरनाथ रेणु अर मीरा पुरस्कार सूं सम्मानित आप री पोथी 'हजार घोडों का सवार' माथै दूरदर्शन सीरियल घणो लोकप्रिय हुयो। चकवे-चकवी की बात, विडंबना, चांदा सेठाणी फिल्मा में राजस्थानी समाज रो साचो चितराम देखण नै मिलै। 'संन्यासी और सुंदरी' उपन्यास रो नाट्य रूपातंरण आकाशवाणी तैयार करयो जिको घणो सराइज्यो।
जवानी में पग धरतां ई लेखक बणण दी हूंस लियां कोडाया-कोडाया यादवेंद्र शर्मा केई-केई जागावां घूम्या-फिरया। पूरी उमर बै लेखक रै ताण जीया। कोई नौकरी कोनी करी। ऐड़ो आखरां रो चाकर बां नै टाळ बीजो कोई कोनी। बै आत्मकथा 'बनजारा रे बनजारा' लिखणी चावता हा पण पूरी नीं लिख सक्या। 'नजर एक चेहरे अनेक' बांरी संस्मरणां री पोथी आं दिनां चर्चा में है। हिंदी में बां री चर्चित पोथ्यां रा नांव इण भांत है- एक ओर मुख्यमंत्री, खम्मा अन्नदाता, जनानी ड्योढी, प्रजाराम, गुलजी गाथा, संन्यासी और सुंदरी, खून का टीका, गुनाहों की देवी, ढोलन कुंजकली, केसरिया पगड़ी, गुलाबड़ी, रनिवास की रूपसी, मोहभंग (उपन्यास), महाराजा शेखचिल्ली, मैं अश्वत्थामा, चार अजूबे (नाटक), जनक की पीड़ा, जंजाल तथा अन्य कहानियां, पीटर बहुत बोलता है, मेहंदी के फूल (कहाणी संग्रै), आपरी इक्यावन कहानियां, चर्चित कहानियां, श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां, मेरी प्रिय कहानियां केई-केई पोथ्यां छपी। डॉ. रांगेय राघव मुजब-'यादवेंद्र शर्मा चंद्र की कलम साहित्य में अपना विशेष महत्त्व रखतीहै।' मन्नू भंडारी रो मानणो है-'सामंती संस्कारों और इतिहास के भीतर उभरते नए जनजीवन के जैसे प्रमाणिक चित्र चंद्र जी ने दिए, वैसे इस क्षेत्र में किसी लेखक ने नहीं दिए।' सांवर दइया पोथी 'उकरास' में लिख्यो है-'राजस्थानी कहाणी में लुगाई नै आपरी बात कैवण रो-साची केवा तो एकदम खुल'र कैवण रो- मौको देवाणिया चंद्र जीवण रा केई ऐड़ा अछूता पख उजागर करया है जिका फगत उणा री कहाणियां में ई लाधै।'
राजस्थानी री हिन्दी में धूम मचावणियां चंद्र जी बरसां पैली 'कालबोध' पत्रिका रो संपादन करयो। राजस्थानी कालजयी कहाणियां और राजस्थानी की प्रतिनिधि कहाणियां रो संपादन ई आपरो जस जोग काम है जिको बरसां याद करीजैला। चंद्र जी रै हिंदी लेखन में राजस्थानी घर, परिवार, समाज, देस अर इतिहास बोलै। राजस्थान में हिंदी में सबसूं बेसी लिखण वाळा चंद्र जी है। 'बिणजारो' पत्रिका खातर म्हैं चंद्र जी सूं बंतळ करी। एक सवाल रै जवाब में बां कैयो- 'आज ई म्हैं राजस्थानी में जितो लिख्यो है, उणा खातर कोई प्रकाशन री कोई व्यवस्था कोनी।आ म्हारी मजबूरी ही कै जिकी चीजां म्हनै मायड़ भाषा राजस्थानी में लिखणी ही.....लिखणी चावतो हो, वै म्हैं हिंदी राष्ट्रभाषा में लिखी।'
'आपणी भाषा-आपणी बात' रा बांचणियां नै अठै ओ कैवणो बिरथा हुवैला कै यादवेंद्र शर्मा 'चंद्र' जिण राजस्थानीरो सपनो देख्यो बो आपां नै पूरो करणो है। सपनो साचो हुयां ई बा नै साची श्रद्घाजंली हुवैला।
"आपणी भाषा : आपणी बात" दैनिक भास्कर में प्रकाशित ।

