विश्व पुस्तक दिवस


लेखकां-कवियां अर पोथ्यां री बात
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नीरज दया
23 अप्रैल। विश्व पुस्तक अर कॉपीराइट दिवस। अंग्रेजी रा महान नाटककार सेक्सपीयर अर बीजा कई लेखकां-कवियां री जयंती का पुण्यतिथि। राजस्थानी में इण सागी दिन तो नीं पण अप्रैल महीनै में कई लेखकां-कवियां रो संजोग इतिहास में मिलै। आ तारीख लेखकां-कवियां नैं सिमरण रो एक ठावो दिन। यूनेस्को आगीवांण बण्यो अर भारत में बरस 1999 सूं ओ दिन मनाइजै। इण पेटै बरस 2003 में दिल्लीनै आखै संसार री पुस्तक-राजधानी हुवण रो रुतबो ई मिल्यो। अबकी बरस बेइरुट (लेबनान) नै ओ मान मिलर्यो है। बाल गंगाधर तिलक रो कैवणो हो कै जे टाळवीं पोथ्यां साथै नरक मिलै तो बठै रैवणो ई कबूलहै। पण ग्लोबल हुवती दुनिया में पोथ्यां सूं प्रीत फीकी पड़ती जाय रैयी है।
राजस्थानी खातर कोई बारलो कोनी सोचैला। आपां राजस्थानियां नै ई सोचणो है। आ आपा री खुद री बात है। जे भाषा अर साहित्य नै भूंलां तो याद कांईं राखांला? आ जिम्मेदारी तो आपां नै खुद ही उठावणी पड़ैला। नींतर आपांबिना पांख्यां रा पखेरू हुय जांवाला। फरज बणै आपां सगळां रो कै आपणी भाषा रै विगसाव खातर कीं काम करां।राजस्थानी समाज रा कई लिखणियां-पढणियां आज रै दिन सभा-गोष्ठियां करै। किताबां बेचणियां आज रै दिन गिरायकां रो आपरी सरधा सारू आव-आदर करै। इतिहास री खोड़ खु़डावणियां प्रकाशक-दुकानदार आज रै दिन पोथ्यां खरीदण वाळां नै गुलाब रै फूल रो निजराणो पेस करै। किणी पोथी या लेखक कवि माथै चरचा राखीजै। आं सगळां सूं महताऊ काम कर सकै है आपणी स्कूलां। पण आ अलख चेतावां आपां मिल परा। दसवीं सूं पैली तो स्कूलां में राजस्थानी कठैई कोनी। तीजी भाषा रै रूप में दूजै प्रांतां री भाषावां तो पढ़ाई जावै पण आपणी राजस्थानी नीं। हाँ, राजस्थान रै पाठ्यक्रम री खासियत राखण रै नांव माथै इक्की-दुक्की राजस्थानी रचनावां जरूर हिंदी री किताबां में राखीजै। देस रै हरेक प्रांत में आप-आप री भाषा पढ़ण रो नेम-कायदो। पण राजस्थान जिको राज रो स्थान है, उण में राजस्थानी रो कायदो कोनी मतलब राज में स्थान में कोनी! फगत राज-राज है। चुणाव रै टैम राज नै राजस्थानी रै स्थान री बात आपरो स्थान बणावण पेटै याद आवै।
ग्यारवीं-बारवीं में राजस्थानी विषय गिणी-चुणी स्कूलां में है। राजस्थानी व्याख्यातावां री पूरी भरती कोनी। कोलेजां रो ई ओ ई हाल। कोई सैण सवाल करै - राजस्थानी लियां सूं कांईं होसी? किणी विषय नै लियां सूं कांईं कोनी हुवै। जे आखरां रो भळको कीं राजस्थानी रो हुयग्यो तो जूण सफल हुय जासी। माटी रा जाया हां तो इण माटी रो कीं करज हळको हुय जासी। जे मिनख होय'र मिनखपणो नीं समझां तो कांईं बात हुवै? भाई साब, बस आ ई बात है कै जे राजस्थानी होय'र राजस्थानी नीं समझां तो कीं कोनी समझां। अर जे आपां राजस्थानी समझां तो कैवण-सुणण री दरकार ई कोनी कै पीड़ कठै अर कांईं!
हाल ओ है कै भाग-दोड़ री जिंदगी में आज बगत ई कठै है? घणा सारा काम-काज है अर ता पछै कीं बगत बचै तो घर-परिवार बिच्चै बैठां कद? सुख-दुख री करण नै ई टैम कोनी। आजकाळै तो बुद्धू-बगसै रो चसको ई जबरो। इत्ता सारा चैनल, सीरियल-फिलमां, बाप रे बाप! इंटरनेट रो जादू ई कम कोनी। टाबर वीडियो गेम में मस्त। किताबां सूं माथाफोड़ी कुण करै? स्टेट लाइब्रेरी में पाठकां री संख्यां दिनोदिन घटती जावै। राजस्थानी पढ़ण-लिखण रो अभ्यास कोनी। हेवा हुवां तो किंयां। ओ तो भलो हुवै भास्कर अखबार रो जिको कोलम चालू कर परो अंधारपख में दीवो चास राख्यो है। भाई साब, थे ई कमाल करो! माफ करो- राजस्थानी पोथी बांचणी आवै कोनी। फेर टैम ई कठै? अखबार ई नीठ देखां। पढ़णा हा जित्ता पढ़ लिया। अब पढ़ां कै काम करां?
तो सा रामजी भला दिन देवै। साव भोळा जीवां बिच्चै एकदम भोळो जीव हुवै- लेखक-कवि रो। आपरी दुनिया में लीन-मगन। लोगां री भाषा में बगनो हुयोडो जीव। राजस्थानी लेखक-कवि खुद लिखै, जिको खुद ई घर रा पइसा लगा परो पोथी छपवावै। दुरगत छपण-छपाण री कैवां तो खुद ई लाजां मरां। पीड़ कुठोड़ अर सुसरो जी बैद वाळी गत। खैर राज री अकादमी ई कदै-कदास कीं फूल सारू पांखड़ी निजर करै देवै। लेखक-कवि खुद री पोथी बांट-बांट'र मजा लेवै। कोई बिक जावै तो समझो लारलै जलम रो लैणियो-दैणियो है। कोपी राइट दिवस अर रोयल्टी री बात मजाक लागै। कई पोथ्यां जिकी भाग सूं बी. ए. अर एम.ए. में लागै। बां री फोटो कोपी बिकै। किताबां पूरी मिलै कोनी तो आधार अर संदर्भ पोथ्यां री बात तो घणी आगै आवै। चकवो-चकवी बात करै हा कै कुवै में भांग पड़गी दाळ में लूण बेसी कोनी लागै। लूण री ई दाळ बणाई है। अबी जे नीं जागां तो कद जागस्यां? छेकड़ में तेजसिंह जोधा री ओळ्यां सूं बात सांवटूं- कीं तो खायगो राज/ कीं लिहाज/ अर रह्यो-सह्यो खायगी चूंध अर खाज....... खम्माघणी।
(ओ आलेख दैनिक भास्कर रै "आपणी भाषा : आपणी बात" खातर लिख्यो अर 23 अप्रैल, 2009 नै छप्यो ।) 
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