राजस्थान री धरती आपरै रूपाळै रंग-रूप में
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नीरज दइया
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कृति- आंख भर चितराम कवि- ओम पुरोहित 'कागद'
संस्करण- 2009 मूल्य- 100 रुपये
संस्करण- 2009 मूल्य- 100 रुपये
प्रकाशक- बोधि प्रकाशन, जयपुर
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`आंख भर चितराम’ कविता-पोथी इक्कीसवीं सदी री टाळवीं पोथी इण सारूं मानीजैला कै कवि ओम पुरोहित `कागद’ आपां सांमी जाण्यां-अणजाण्यां जिका चितराम राख्या है वै बुणगट में साव नुंवा है । आपरी भासा अर रचाव रै पाण कवि राजस्थानी कविता रो एक इसो आंटो काढियो है जिको आज रै जुग री जरूरत है ।
कमती सूं कमती सबदां में कविता रचणी अर उण पछै ई भासा में लय नै साधणो घणो अबखो काम मानीजै, आ खासियत जाणै कवि नै इण कविता-संग्रै री अमूमन सगळी कवितावां में किणी वरदान रूप हासल हुयोडी है । ओम पुरोहित `कागद’ री कविता में राजस्थान री धरती आपरै रूपाळै रंग-रूप में सज-धज परी उतरी है।
कवि आपरै आसै-पासै रा दीठाव रचती बगत जिका चितराम कविता में कलम सूं कोरिया है बै आपां रै अठै री धरती सूं जुडया थका नै घणा रुपाला लखावै जैडा है। अठै री धरती माथै बिखरी छटवां नै कवि हियै सूं अंग्रेजी है।कवि आपरी कलम री कोरणी सूं जिका चितराम रचण री आफळ करी है बै घणा मनमोवणा आड़ किणी मूंढै बोलतै रंगीन फोटूवां दाई कवितावां में आपां नै निगै आवै।
लोक अर जन सूं जुडावा रा केई चितरामां भेळै काळीबंगा माथै लिख्योडी कवितरां री लडी इण पोथी री न्यारी निरवाळी ठौड बणावैला। पतियारो है कै झींणी संवेदना सूं सजी इण पोथी रो राजस्थानी कविता जातरा में जोरदार स्वागत हुवैला।
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